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GANGAUR GAURI TEEJ

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Gangaur 2018 Date & Time – Gauri Teej (Third day of Chaitra Navratri)

राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा के कुछ हिस्सों में गौरी तृतीया, जिसे लोकप्रिय रूप से गणगौर कहा जाता है, को बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। गणगौर त्योहार 18 दिन का त्योहार है जो चैत्र माह के पहले दिन से शुरू होता है। गणगौर पूजा भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है और यह एक हिंदू त्योहार है जो वैवाहिक सुख का उत्सव है। ‘गण’ का अर्थ है शिव और ‘गौर’ का अर्थ पार्वती है। इस दिन इस दिव्य युगल की अपने पति की लम्बी उम्र के लिए सभी महिलाओं द्वारा पूजा की जाती है। इस दिन को सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है।

गौरी तृतीया 2018

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, इस वर्ष गौरी तृतीया या गणगौर इस दिन मनाया जाएगा

मंगलवार, 20 मार्च 2018

गौरी तृतीया - महत्व

हिंदू संस्कृति में, तीज का महत्व बहुत बड़ा है। इस दिन को भगवान शिव और देवी पार्वती के प्रेम और विवाह दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह माना जाता है कि अलगाव के दिन और महीनों के बाद देवी पार्वती भगवान शिव के साथ फिर से आए थे। विवाहित महिलाऐं गौरी पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक खुशी के लिए प्रार्थना करती हैं जबकि अविवाहित महिलाओं एक आदर्श जीवन साथी के लिए देवी पार्वती से प्रार्थना करती हैं। कहा जाता है कि गौरी तीज को मनाने और पालन करने वाले भक्तों को खुशी, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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गौरी तृतीया - रीति-रिवाज और उत्सव

गौरी पूजा और गणगौर त्यौहार के साथ जुड़ी रस्में रंगों और श्रद्धा से भरी हैं। गौरी तीज का उत्सव सुबह से ही शुरू होता है जब महिलाएं स्नान करती हैं और गणगौर पूजा करने के लिए पारंपरिक वेशभूषा में तैयार होती हैं। होलिका दहन की राख और गीली मिट्टी मिश्रित करती हैं और फिर गेहूं और जौ बोऐ जाते हैं और 18 दिनों तक इसे पानी दिया जाता है, जब तक गणगौर महोत्सव की समाप्ति नहीं होती। महिलाऐं इस दिन उपवास करती हैं और अपने पति के लंबे जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं। गौरी तृतीया या गणगौर के आखिरी तीन दिनों में, उनके प्रस्थान की तैयारी शुरू हो जाती है। गौरी और इस्सार को उज्ज्वल परंपरागत पहनावे पहनने के लिए और फिर एक शुभ समय के दौरान विवाहित और अविवाहित महिलाएं दोनों देवताओं की मूर्तियों को स्थापित करती हैं और एक बगीचे में एक रंगीन और सुंदर जुलूस निकालती हैं। गौरी के अपने पति के घर जाने से संबंधित महिलाऐं गणगौर गीत गाती हैं। अंतिम दिन, गौरी और इस्सार की मूर्तियां पानी में प्रवाहित की जाती हैं। यह गणगौर त्योहार के समापन का प्रतीक है।

GAURI TRITIYA 2018

Gauri Tritiya, popularly known as Gangaur, is celebrated extensively in parts of Rajasthan, Gujarat, Madhya Pradesh and Haryana. Gangaur festival is a 18 day long festival that begins on the first day of Chaitra month. Gangaur Puja is dedicated to Lord Shiva and Goddess Parvati and is a Hindu festival that celebrates marital happiness. ‘Gana’ means Shiva and ‘Gaur’ means Parvati and this divine couple is worshipped by all the womenfolk on this day for long life of their husbands. This day is also known as Saubhagya Teej.  

GAURI TRITIYA 2018 Date

According to Hindu Calendar, this year Gauri Tritiya or Gangaur will be celebrated on

Tuesday, 20th March 2018

GAURI TRITIYA - SIGNIFICANCE

In Hindu culture, the importance of Teej is immense. It is a day that celebrates the marriage and love between Lord Shiva and Goddess Parvati. It is believed that only after days and months of separation did Goddess Parvati reunited with Lord Shiva. Married women perform Gauri Puja and pray for their husband's long life and marital happiness whereas unmarried women pray to Goddess Parvati for an ideal life partner. Devotees who celebrate and observe Gauri Teej are said to be blessed with happiness, prosperity and longevity.

GAURI TRITIYA - RITUALS AND CELEBRATIONS

The rituals associated with Gauri Puja and Gangaur festival are full of colors, vibrance and reverence. The celebrations for Gauri Teej begin from early morning hours when women take shower and get dressed in traditional attires to perform Gangaur Puja. The ash of Holika Dahan and mud are mixed and then grains of wheat and barley are sowed and watered for 18 days till the culmination of Gangaur Festival. Women observe fasts on this day and pray for their husband’s long life. On the last three days of Gauri Tritiya or Gangaur, preparation of their departure commence.  Gauri and Isar are made to wear bright traditional attires and then during an auspicious hour, married as well as unmarried women place the idols of both the deities and take out a colorful and beautiful procession in a garden or a step well. Women sing Gangaur Geet related to the departure of Gauri to her husband’s house. On the final day, images of Gauri and Isar are put in a water tank or well. This marks the conclusion of Gangaur festival.

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