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SANDHI PUJA

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संधि पूजा एक महत्वपूर्ण परंपरा है जिसे नवरात्रि उत्सव के दौरान मनाया जाता है। है और नवमी तिथी शुरू होती है। अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट को नवमी तिथि के शुरूआती 24 मिनट एक साथ सधिक्षण बनाते हैं, जब वास्तव में देवी दुर्गा ने देवी चामुंडा का अवतार लिया और राक्षस चंड और मुंडा को नष्ट कर दिया।

संधि पूजा 2018 तिथि और समय

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, संधि पूजा को मनाया जाएगा

रविवार, 25 मार्च 2018

चैत्र नवरात्री संधि पूजा मुहूर्त - 7:38 पूर्वाह्न 8:26 पूर्वाह्न

संधि पूजा - महत्व और समारोह

कथाओं के अनुसार संधि पूजा का विशेष महत्व है। हिंदू पौराणिक कथाओं में, संधि पूजा कथा के अनुसार, जब देवी दुर्गा दानव महिषासुर के साथ लड़ रही थी, उनके सहयोगी चंड और मुंड ने देवी दुर्गा पर पीछे से प्रहार किया, जिससे देवी क्रोधित हो गई और उनका चेहरा गुस्से में नीले रंग में बदल गया।

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इसने देवी ने अपनी तीसरी आंख खोली और देवी दुर्गा के चामुंडा अवतार का रूप ले लिया और दोनों दुष्ट राक्षसों को मार डाला। देवी दुर्गा का भयंकर अवतार, चामुंडा के सम्मान में संधि पूजा की जाती है।

संधि पूजा विधि एक भव्य तरीके से की जाती है। इस दिन दुर्गा पूजा, 108 दीये, 108 कमल, 108 बेल के पत्ते, गहने, पारंपरिक कपड़े, हिबिस्कस फूल, चावल अनाज (बिना पके) और एक लाल फल व माला का उपयोग कर किया जाता है। संधि पूजा मंत्र में, इन वस्तुओं को देवी को पेश किया जाता है।

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हालांकि हर परिवार का संधी पूजा करने का अपना विशिष्ट तरीका है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाता है कि पूजा ठीक उसी समय शुरू हो जब संधिक्षण शुरू होता है। इस पूजा के लिए मुहूर्त किसी भी स्थिति और किसी भी समय पर आ सकता है और यह केवल उसी समय किया जाना चाहिए।

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इस क्षण की घोषणा आज भी ढोल, नगाड़े और ड्रम से की जाती है। यह त्योहार बहुत ही सम्मानित है क्योंकि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का स्मरण करता है।

Sandhi Puja is an important tradition that is followed during Navratri festivities. This puja is performed at a peculiarly specific time, i.e. during the time when Ashtami tithi ends and Navami tithi begins.

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The last 24 minutes during Ashtami tithi and the first 24 minutes during Navami tithi together make Sandhikhan i.e. the exact time when Goddess Durga took the avatar of Goddess Chamunda and annihilated the demons Chanda and Munda.

Sandhi Puja 2018 Date and Time

According to Hindu Calendar, Sandhi Puja will be celebrated on

Sunday, 25th March 2018

Chaitra Navratri Sandhi Puja Muhurat - 7:38 AM to 8:26 AM

Sandhi Puja - Importance and Celebrations

The significance of Sandhi Puja lies in the legend behind it. In Hindu mythology, according to Sandhi Puja story, when Goddess Durga was fighting with the demon Mahishasura, his associates Chanda and Munda attacked Goddess Durga from behind which enraged the Goddess and her face turned blue in anger.

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This opened her third eye and Chamunda avatar of Goddess Durga took form and killed both the evil demons. Sandhi Puja is done in reverence of Chamunda, the fierce avatar of Goddess Durga.  

Sandhi Puja Vidhi is done in a grand manner. Durga Puja, on this day, is done using 108 earthen lamps, 108 lotuses, a garland of 108 bel leaves, jewellry, traditional clothes, hibiscus flowers, rice grains (uncooked) and a red fruit. Amidst recitals of Sandhi Puja Mantra, these items are offered to the Goddess.

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Although every family has their own unique way of doing Sandhi Puja, but it is ensured that the puja commences at the exact moment when Sandhikhan begins.

The muhurat for this Puja can fall at any point and any hour and it should be performed only at that very time.  This moment is announced with dhols, dakhs and drum beats, even today. This festival holds a great deal of reverence as it commemorates the victory of good over evil.


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