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SINDHARA DOOJ

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सिंधारा दूज नवरात्रि के दूसरे दिन उत्तरी भारत के सभी हिस्सों में महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला सबसे शुभ और जीवंत उत्सव है। यह एक ऐसा दिन है जब सभी उत्सव बहूओं को समर्पित होते हैं। कुछ महिलाएं इस दिन उपवास भी करती हैं और अपने पतियों की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं।

उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में सभी महिलाओं द्वारा सिंधारा दूज को बहुत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। कुछ हिस्सों में, महिलाएं एक-दूसरे के साथ उपहारों का आदान-प्रदान करती हैं और पारंपरिक पोशाक भी पहनती हैं। शाम में, देवी को मिठाई और फूल अर्पण कर बेहद श्रद्धा के साथ गौरी पूजा की जाती है। सिंधारा दूज को सौभाग्य दूज, गौरी द्वितिया या स्थान्य वृद्धि के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की भी पूजा की जाती है।

सिंधारा दूज 2018 तिथि

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सिंधारा दूज 2018 को मनाया जाएगा

19 मार्च 2018

सिंधारा दूज - रीति-रिवाज और समारोह

  • सिंधारा दूज के शुभ त्यौहार पर, महिलाओं ने खुद को पारंपरिक पोशाक में सजाती हैं, अपने हाथों और पैरों पर मेहन्दी लगाती हैं और भारी गहने पहनती हैं। चूड़ीयां इस उत्सव का अभिन्न अंग है। वास्तव में, नई चूड़ीयां खरीदना और अन्य महिलाओं को चूड़ीयों का उपहार देना भी इस उत्सव की एक दिलचस्प परंपरा है।
  • मुख्य रूप से यह बहुओं का त्योहार है। इस दिन सास अपनी बहुओं को भव्य उपहार प्रस्तुत करती हैं, जो अपने माता-पिता के घर में इन उपहारों के साथ आते हैं। सिंधारा दूज के दिन, बहूऐं अपने माता-पिता द्वारा दिए गए ‘बाया’ लेकर अपने ससुराल वापस आ जाती हैं। ‘बाया’ में फल, व्यंजन और मिठाई और धन शामिल होता है।
  • शाम को गौर माता या देवी पार्वती की पूजा करने के बाद, वह अपनी सास को यह ‘बाया’ भेंट करती हैं।
  • दक्षिण भारत में, खासकर तमिलनाडु और केरल में, महेश्वरी सप्तमत्रिका पूजा सिंधारा दूज के दिन की जाती है।
  • यह महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है, क्योंकि वे एक सुखी और आनंदित विवाहित जीवन के लिए गौर माता का आशीर्वाद चाहती हैं।

Sindhara Dooj 2018 date & puja vidhi (Second day of Chaitra Navratri)

Sindhara Dooj is one of the most auspicious and vibrant festival celebrated by womenfolk in all parts of northern India on the second day of Navratri. It is a day when all the festivities are dedicated to daughter-in-laws. Some women also observe fast on this day and pray for the longevity of their husbands.

All the women in parts of Northern India celebrate Sindhara Dooj with much vigor and enthusiasm. In some parts, women also exchange gifts with each other and don traditional attires. In the evening, Gauri Puja is performed with utmost devotion along with the offering of sweets and flowers. Sindhara Dooj is also known as Saubhagya Dooj, Gauri Dwitiya or Sthanya Vriddhi. Maa Brahmacharini is also worshipped on this day.

See Also: Gangaur (Gauri Teej) - Third day of Chaitra Navratri

Sindhara Dooj 2018 Date

According to Hindu Calendar, Sindhara Dooj 2018 will be celebrated on

19th March 2018

Sindhara Dooj - Rituals and Celebrations  

    • On the auspicious festival of Sindhara Dooj, women clad themselves in bright traditional attires, apply mehendi on their hands and feet and deck themselves in heavy jewelry. Bangles form an integral part of this festival. In fact, purchasing new bangles and gifting them to other women is also an interesting tradition of this festivity.

    • It is essentially a festival for daughter in laws. Mothers-in-law on this day shower lavish gifts and presents on their daughters-in-law, who, then visit their parents’ house with these presents. On the day of Sindhara Dooj, daughters-in-law then come back to their in-laws’ house bringing ‘baya’ given by her mother. ‘Baya’ comprises of fruits, delicacies and sweets, and token of money.

    • After worshipping Gaur Mata or Goddess Parvati in the evening, they present this ‘baya’ to their mother-in-law.

    • In South India, especially in Tamil Nadu and Kerala, Maheshwari Saptamatrika Puja is done on the day of Sindhara Dooj.

It is a significant festival for women as they seek the blessings of Gaur Mata for a happy and blissful married life.


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