Savan Somvar Puja Vidhi

Savan Somvar Puja Vidhi
Author : Admin

Date : 24 जुलाई, 2018

सोमवार के दिन का शिव भक्तों के लिए एक विशेष महत्व होता है| सावन मास के पवित्र अवसर पर देश भर में श्रद्धालु शिव मंदिरों में भगवान् भोलेनाथ की पूजा करने के लिए पहुँचते है| सावन मास के अंदर शिव भगवान् की पूजा अर्चना करने वाले भक्तों को काफी लाभदायक फल मिलते हैं, ऐसा हिन्दू शास्त्रों की मान्यता है| इस साल में 30 जुलाई से सावन सोमवार के व्रत प्रारम्भ हो रहे हैं| तो आइये जानते हैं की सावन सोमवार का क्या महत्व है और भगवान् शिव को यह महीना क्यों पसंद है?

हिन्दू पुराणों के अनुसार स्वयं भगवान भोलेनाथ ने नारद मुनि को इस मास का महत्व बताया था| शिव भगवान के अनुसार उनके त्रिनेत्र में चन्द्रमा वाम नेत्र में, अग्नि मध्य वाले नेत्र में और सूर्य दाहिने नेत्र में विराजमान हैं| सूर्य की राशि सिंह है और चन्द्रमा की राशि कर्क है और ऐसे में जब सूर्य कर्क से सिंह राशि की तरफ जब बढ़ते हैं तो इसे काफी शुभ और फलदायक माना गया है| यह शुभ संयोग सिर्फ सावन के मास में होता है इसीलिए भगवान् भोलेनाथ को यह मास अतिप्रिय है|

इस साल में 16 जुलाई को सूर्य का प्रवेश कर्क राशि में हुआ है और वे अब सिंह राशि की तरफ आगे बढ़ रहे हैं|

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सावन सोमवार व्रत की विधि

सावन सोमवार के व्रत का उपयुक्त समय सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक होता है| इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर और नित्यकर्म अदि से निवृत्त होने के बाद हरे या श्वेत रंग के कपडे कपडे पहनने के बाद पूजा अर्चना करनी चाहिए| इस दिन किसी भी तरह की तामसिक वस्तुओं से, काम, क्रोध, लोभ और ईर्ष्या से भी बचना चाहिए| संध्या की प्रदोष बेला में शिव भगवान के परिवार की सोलह तरीकों से पूजा अर्चना करनी चाहिए| पूजन के लिए सामर्ग्री में दूवी, पुष्प इत्यादि की सोलह संख्याओं से अर्चना करने से जातक की सारी इच्छाओं की पूर्ती होती है| पुराणों के अनुसार कि सावन मास के अंदर अगर सोमवार व्रत किया जाए तो सम्पूर्ण वर्ष के सोमवार व्रत के फल मिलता है| इस दिन सिर्फ रात्रि के समय भोजन करना चाहिए और भगवान शिव की पूजा अर्चना करनी चाहिए| सावन सोमवार के व्रत की विधि भी अन्य सोमवार के व्रत की तरह होती है|

स्कंदपुराण के अनुसार भगवान शिव के साथ माता पार्वती जी की भी पूजा करनी चाहिए और सामग्री में धूप, पुष्प, दीप, एवं जल होना चाहिए| तत्पश्चात भगवान भोलेनाथ को अलग अलग तरह के नैवैद्य अर्पण करने चाहिए जैसे कंदमूल, जल, दूध इत्यादि| जातक को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हर सोमवार को भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाना चाहिए| रात्रि के समय जमीन पर शयन करना चाहिए| सावन के पहले सोमवार से प्रारम्भ करके कुल मिला कर 9 या 16 सोमवार को इस व्रत का पालन करना चाहिए| इस व्रत के उद्यापन को नवें या सोलहवें सोमवार को किया जाना चाहिए|कई बार सारे सोमवार को व्रत रख पाना असंभव होता है तो जातक सावन के महीने में सिर्फ चार सोमवार भी व्रत कर सकते हैं|

पूजा विधि (सावन शिवरात्रि)

पूजा करने के स्थान पर पूजा सामग्री के ऊपर गंगाजल का छिड़काव करें और इस मंत्र का जाप करें- ऊंअपवित्र: पवित्रोवासर्वावस्थांगतोऽपिवा. य: स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: सूचि:

तत्पश्चात नीचे दिया गया मंत्र पढ़ते हुए तीन बार आचमन करें|

ॐ केशवायनम:, ॐ नारायणायनम:, ॐ माधवायनम: | इसके बाद इस मंत्र का उच्चारण करते हुए अपने हाथों को धो लें- ॐ हृषीकेशायनम:|इसके बाद ये मंत्र बोलते हुए सबको तिलक लगाएं- ॐ चंदनस्यमहत्पुण्यंपवित्रंपापनानम | आपदांहरतेनित्यंलक्ष्मी: तिष्ठतिसर्वदा | उसके बाद ये मंत्र का उच्चारण करते हुए कलावा बाँध लें - येनबद्धोबलीराजादानवेन्द्रोमहाबल: | तेनत्वांप्रतिबंध्नामिरक्षेमाचलमाचल ||

अब दीप को प्रज्ज्वलित करें और इस मंत्र का जाप करें- दीपोज्योति: परंब्रम्हदीपोज्योति: जनार्दन: | दीपोहरतुमेंपापंदीपज्योति: नमोऽस्तुते ||अब भगवान भोलेनाथ को स्नान, दहीस्नान , आचमन, आसन, शहद स्नान, घीस्नान एवम शक्करस्नान करवाएं| अब इस मंत्र का जाप करते हुए पुष्पांजलि अर्पित करें- माल्यादीनिसुगन्धीनिमालत्यादीनिवैप्रभो | मयाहृतानिपुष्पाणिगृह्यन्तांपूजनायभोः ||

तत्पश्चात नैवैद्य अर्पण करें- शर्कराखण्डखाद्यानिदधिक्षीरघृतानिच | आहारंभक्ष्यभोज्यंचनैवेद

इस सब के बाद शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग के ऊपर पुष्प, चन्दन और दूध चढ़ाएं| इसके पश्चात् पंचामृतस्नान, सुगंधस्नान एवं सुधजल के द्वारा स्नान कराएं| अब भगवान भोलेनाथ को वस्त्र एवं जनेऊ अर्पित करें| इसके पश्चात नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करते हुए पुष्पमाला, अक्षत एवं बिल्वपत्र के अर्पण करें|

नमोबिल्ल्मिनेचकवचिनेचनमोवर्म्मिणेचवरूथिनेच

नमःश्रुतायचश्रुतसेनायचनमोदुन्दुब्भ्यायचाहनन्न्यायचनमोघृश्णवे॥

दर्शनंबिल्वपत्रस्यस्पर्शनम्‌पापनाशनम्‌।अघोरपापसंहारंबिल्वपत्रंशिवार्पणम्‌॥

त्रिदलंत्रिगुणाकारंत्रिनेत्रंचत्रिधायुधम्‌।त्रिजन्मपापसंहारंबिल्वपत्रंशिवार्पणम्‌॥

अखण्डैबिल्वपत्रैश्चपूजयेशिवशंकरम्‌।कोटिकन्यामहादानंबिल्वपत्रंशिवार्पणम्‌॥गृहाणबिल्वपत्राणिसपुश्पाणिमहेश्वर।सुगन्धीनिभवानीशशिवत्वंकुसुमप्रिय।

अपने हाथों में अक्षत और बिल्वपत्र लेकर भगवान भोलेनाथ की पूजा करें|

विशेष- साल 2018 में सावन सोमवार व्रत 28 जुलाई से आरम्भ होंगे और 26 अगस्त को समाप्त हो जाएंगे|

Please Read: Sawan Somwar Vrat Dates 2018


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