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राहु काल के बारे में जानें

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु काल का समय अशुभ माना जाता है। किसी शुभ कार्य को राहु काल के दौरान नहीं किया जाता। राहु काल के प्रभाव को कम करने के लिए पूजा, हवन एवं यज्ञ किये जाते हैं। राहु काल में किए गये शुभ कार्य कभी पूर्ण नहीं होते।

आज का राहु काल, राहु काल के उपाय एवं महादशा

हालांकि राहु काल में राहु काल से संबंधित किये गये कार्य शुभ होते हैं जैसे हवन, पूजा एवं यज्ञ। दक्षिण भारत के लोगों के लिए राहु काल बहुत महत्व रखता है। राहुल काल के समय में गृह प्रवेश, शेयर, सोना, घर, सगाई या अन्य कोई शुभ कार्य करना उचित नहीं माना जाता।

राहु काल को राहु काल, राहु काला, राहु कालम एवं राहु कालाम भी कहा जाता है। राहु काल लगभग 90 मिनट का होता है जो कि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक होता है। सूर्योदय से सुर्यास्त के कुल समय को 8 भागों में बांटा जाता है।

सूर्योदय एवं सूर्यास्त के क्षणों को सूर्योदय एवं सूर्यास्त की ज्यामितिय गणना से जाना जाता है। ज्यामितिय सूर्योदय में अपवर्तन को नहीं माना जाता, इसीलिए यह अवलोकन से बिल्कुल अलग होता है। सूर्योदय के समय जब सूर्य का उपरी हिस्सा दिखाई देता है तो उसे अवलोकन सूर्योदय कहा जाता है तथा जब सूर्योदय के समय सूर्य का बीच का हिस्सा दिखाई देता है तो उसे ज्यामितिय सूर्योदय कहा जाता है।

सूर्योदय एवं सूर्यास्त का समय दो शहरों के लिए अलग-अलग होता है, इसलिए राहु काल का समय एवं अवधि कभी एक जैसी नहीं हो सकती। सूर्योदय एवं सूर्यास्त का समय प्रत्येक वर्ष प्रत्येक शहर के लिए बदलता रहता है। निष्कर्ष यह है कि राहु काल का समय प्रत्येक शहर एवं दिन के हिसाब से अलग होता है।

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