2020 एकादशी व्रत

date  2020
Ashburn, Virginia, United States

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एकादशी व्रत

2020

Ashburn, Virginia, United States

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एकादशी व्रत

एकादशी व्रत हिन्दू कैलेंडर के अनुसार बहुत ही शुभ व्रत माना जाता है। एकादशी शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘ग्यारह’ । प्रत्येक महीने में दो एकादशी होती हैं जो कि शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष के दौरान आती हैं। mPanchang पर आप एकादशी से जुडी सभी जानकारी देख सकते हैं।

एकादशी व्रत बहुत ही सख्त होता है। यह एकादशी तिथि से पहले सूर्यास्त से लेकर एकादशी से अगले सूर्योदय तक रखा जाता है यह करीब 48 घंटे का व्रत होता है।

साल 2020 के लिए एकादशी व्रत की सूची

तिथि दिनांक तिथि का समय

पौशा पुत्रदा एकादशी(शु) जनवरी, 2020

06 जनवरी

(सोमवार)

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षटतिला एकादशी(कृ) जनवरी, 2020

20 जनवरी

(सोमवार)

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जाया एकादशी(शु) फरवरी, 2020

05 फरवरी

(बुधवार)

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विजया एकादशी(कृ) फरवरी, 2020

18 फरवरी

(मंगलवार)

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आमलकी एकादशी(शु) मार्च, 2020

05 मार्च

(गुरुवार)

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पापमोचनी एकादशी(कृ) मार्च, 2020

19 मार्च

(गुरुवार)

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कामदा एकादशी(शु) अप्रैल, 2020

04 अप्रैल

(शनिवार)

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वरुथिनी एकादशी(कृ) अप्रैल, 2020

18 अप्रैल

(शनिवार)

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मोहिनी एकादशी(शु) मई, 2020

03 मई

(रविवार)

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अपरा एकादशी(कृ) मई, 2020

17 मई

(रविवार)

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निर्जला एकादशी(शु) जून, 2020

01 जून

(सोमवार)

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योगिनी एकादशी(कृ) जून, 2020

16 जून

(मंगलवार)

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देवशयनी एकादशी(शु) जुलाई, 2020

01 जुलाई

(बुधवार)

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वैष्णव कामिका एकादशी(कृ) जुलाई, 2020

16 जुलाई

(गुरुवार)

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श्रवण पुत्रदा एकादशी(शु) जुलाई, 2020

30 जुलाई

(गुरुवार)

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अजा एकादशी(कृ) अगस्त, 2020

14 अगस्त

(शुक्रवार)

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परस्व एकादशी(शु) अगस्त, 2020

28 अगस्त

(शुक्रवार)

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इंदिरा एकादशी(कृ) सितम्बर, 2020

13 सितम्बर

(रविवार)

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पापांकुशा एकादशी(शु) सितम्बर, 2020

27 सितम्बर

(रविवार)

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रमा एकादशी(कृ) अक्तूबर, 2020

12 अक्तूबर

(सोमवार)

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देवउत्थाना एकादशी(शु) अक्तूबर, 2020

26 अक्तूबर

(सोमवार)

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रमा एकादशी(कृ) नवम्बर, 2020

11 नवम्बर

(बुधवार)

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देवउत्थाना एकादशी(शु) नवम्बर, 2020

25 नवम्बर

(बुधवार)

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उत्पन्न एकादशी(कृ) दिसम्बर, 2020

10 दिसम्बर

(गुरुवार)

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मोक्षदा एकादशी(शु) दिसम्बर, 2020

25 दिसम्बर

(शुक्रवार)

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एकादशी का महत्व

हिन्दू पुराणों के अनुसार एकादशी को ‘हरी वसर’ एवं ‘हरी दिन’ भी कहा जाता है। एकादशी वैष्णव एवं गैर-वैष्णव दोनों समुदाय द्वारा मनाया जाता है। एकादशी के महत्व को स्कन्द पुराण एवं पदम् पुराण में भी बताया गया है। जो भक्त व्रत रखते हैं वो इस दिन गेहूं, मसाले एवं सब्जियां नहीं खाते। श्रद्धालू इस व्रत की तैयारी एकादशी से एक दिन पहले दशमी से ही प्रारंभ करते हैं। श्रद्धालू सुबह जल्दी उठकर पवित्र जल से स्नान करते हैं एवं इस दिन बिना नमक का खाना खाते हैं।

एकादशी व्रत के नियम

ताजा फल, सूखे मेवे, सब्जी एवं दूध से बनी मिठाई ही इस दिन खाई जाती है एवं कुछ राज्यों में केवल साबुदाना, मूंगफली एवं आलू का ही भोजन इस दिन किया जाता है। दाल एवं शहद दशमी के दिन भी नहीं खाया जाता। इस दिन कुछ लोग पानी भी नहीं पीते, इसलिए इसे निर्जला एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। कुछ श्रद्धालू रात में एकादशी व्रत की कथा, कहानी एवं मंत्र पढ़ते हैं।

एकादशी के अगले दिन को द्वादशी कहा जाता है। यह दशमी या अन्य दिनों की तरह दिन आम दिन होता है। सुबह जल्दी नहाकर, दीऐ जलाकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है एवं दशमी के दिन बनाया गया भोजन खाकर व्रत पूर्ण किया जाता है।

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