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वक्री

वक्री ग्रह

जब कोई ग्रह पीछे हटने लगता है तो उसकी जीवनशक्ति उलट व अधिक व्यक्तिगत हो जाती है। उस व्यक्ति की बाहरी दुनिया में अभिव्यक्ति की उर्जा धीमी हो जाती है क्योंकि वक्री ग्रह वाले व्यक्ति को खर्च की गई उर्जा का व्यापक दृश्य नहीं मिलता है। दुनिया में बहुत से विलक्षण ग्रह वाले व्यक्ति हैं। व्यक्तिगत संदर्भ में इन ग्रहों के पीछे हटने की गति बहुत महत्वपूर्ण है: शुक्र, बृहस्पति, मंगल, शनि व बुध ।

कार्मिक व्यक्तियों के संदर्भ में वक्री ग्रह राशिफल की गणना में बहुत महत्व रखता है। वक्री ग्रह की गति सामने वाले ग्रह की गति को दर्शाती है। जैसा कि ज्ञात है सूर्य व चन्द्रमा कभी भी वक्री गति से नहीं चलते। वक्री ग्रह हमें बीते हुऐ जीवनकाल के बारे में बताते हैं जब हमने जीवन की शिक्षाओं को सही तरीके से नहीं समझा था। इस जीवन में, यह हमारा कर्तव्य है कि हम उन गलतियों को ठीक करें ओर इसके लिए हमारे पास अनपेक्षित स्थिति होगी।

ग्रह कुछ समय की अवधि के लिए आसमान में पीछे हटते हैं इस स्थिति को वक्री कहा जाता है। जब कोई ग्रह जन्म पत्रिका में वक्री होता है तो माना जाता है कि उर्जा मुड गई है। इस समयावधि के दौरान सामान्य से अधिक अनुभवी व दृढ़ महसूस करते हैं व मूल/अंदर की उर्जा उजागर होती है।

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