2020 गणगौर

date  2020
Ashburn, Virginia, United States

गणगौर
Panchang for गणगौर
Choghadiya Muhurat on गणगौर

गणगौर या गौरी तीज (चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन)

राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा के कुछ हिस्सों में गौरी तृतीया, जिसे लोकप्रिय रूप से गणगौर कहा जाता है, को बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। गणगौर त्योहार 18 दिन का त्योहार है जो चैत्र माह के पहले दिन से शुरू होता है। गणगौर पूजा भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है और यह एक हिंदू त्योहार है जो वैवाहिक सुख का उत्सव है। ‘गण’ का अर्थ है शिव और ‘गौर’ का अर्थ पार्वती है। इस दिन इस दिव्य युगल की अपने पति की लम्बी उम्र के लिए सभी महिलाओं द्वारा पूजा की जाती है।

इस दिन को सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है।

गौरी तृतीया कब हैं?

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, इस वर्ष गौरी तृतीया या गणगौर उत्सव चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन मनाया जाएगा।

गौरी तीज - महत्व

हिंदू संस्कृति में, तीज का महत्व बहुत बड़ा है। इस दिन को भगवान शिव और देवी पार्वती के प्रेम और विवाह दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह माना जाता है कि अलगाव के दिन और महीनों के बाद देवी पार्वती भगवान शिव के साथ फिर से आए थे। विवाहित महिलाऐं गौरी पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक खुशी के लिए प्रार्थना करती हैं जबकि अविवाहित महिलाओं एक आदर्श जीवन साथी के लिए देवी पार्वती से प्रार्थना करती हैं। कहा जाता है कि गौरी तीज को मनाने और पालन करने वाले भक्तों को खुशी, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

गणगौर (सौभाग्य तीज) - रीति-रिवाज और उत्सव

गौरी पूजा और गणगौर त्यौहार के साथ जुड़ी रस्में रंगों और श्रद्धा से भरी हैं। गौरी तीज का उत्सव सुबह से ही शुरू होता है जब महिलाएं स्नान करती हैं और गणगौर पूजा करने के लिए पारंपरिक वेशभूषा में तैयार होती हैं। होलिका दहन की राख और गीली मिट्टी मिश्रित करती हैं और फिर गेहूं और जौ बोऐ जाते हैं और 18 दिनों तक इसे पानी दिया जाता है, जब तक गणगौर महोत्सव की समाप्ति नहीं होती। महिलाऐं इस दिन उपवास करती हैं और अपने पति के लंबे जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं। गौरी तृतीया या गणगौर के आखिरी तीन दिनों में, उनके प्रस्थान की तैयारी शुरू हो जाती है। गौरी और इस्सार को उज्ज्वल परंपरागत पहनावे पहनने के लिए और फिर एक शुभ समय के दौरान विवाहित और अविवाहित महिलाएं दोनों देवताओं की मूर्तियों को स्थापित करती हैं और एक बगीचे में एक रंगीन और सुंदर जुलूस निकालती हैं। गौरी के अपने पति के घर जाने से संबंधित महिलाऐं गणगौर गीत गाती हैं। अंतिम दिन, गौरी और इस्सार की मूर्तियां पानी में प्रवाहित की जाती हैं। यह गणगौर त्योहार के समापन का प्रतीक है।

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