2020 कजरी तीज

date  2020
Ashburn, Virginia, United States

कजरी तीज
Panchang for कजरी तीज
Choghadiya Muhurat on कजरी तीज

कजरी तीज व्रत और महत्वपूर्ण अनुष्ठान

कजरी तीज महोत्सव क्या है?

कजरी तीज, जिसे काजली तीज भी कहा जाता है, पूरे भारत में व्यापक रूप से मनाई जाती है। यह हिंदू त्यौहार अंधेरे पखवाड़े (कृष्ण पक्ष) के तीसरे दिन भद्रपद के चंद्र महीने में मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, कजरी तीज आमतौर पर जुलाई या अगस्त के महीने में आती है। यह मूल रूप से एक ऐसा त्यौहार है जिसे हिंदू महिलाओं द्वारा मुख्य रूप से मनाया जाता है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख क्षेत्रों में इस त्यौहार का बहुत महत्व है।

कजरी तीज कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, कजरी तीज भाद्रपद (हिंदी महीना) के समय में कृष्ण पक्ष की तृतीया (तीसरे दिन) को मनाई जाती हैं।

चौघड़िया के साथ दिन का शुभ समय जानें

कजरी तीज का महत्व क्या है?

कजरी तीज त्यौहार को कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में सातुड़ी तीज और बुंदी तीज के नाम से भी जाना जाता है। जबकि हरियाली तीज को छोटी तीज के नाम से जाना जाता है, इसे बडी तीज के नाम से जाना जाता है। हालांकि, इस उत्सव का विवाहित महिलाओं के लिए भी समान महत्व है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि कजरी तीज पर उपवास रखने से महिलाओं को उनके विवाहित जीवन में अत्यधिक आनंद और खुशियों का आशीर्वाद मिलता है।

कजरी तीज के क्या-क्या अनुष्ठान होते हैं?

कजरी तीज की पूर्व संध्या बहुत उत्साह और खुशी के साथ मनाई जाती है। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों में लोग अपने अनुसार भी इस त्यौहार मनाते हैं लेकिन बुनियादी अनुष्ठान आम हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं:

  • पतियों की दीर्घायु और अच्छे भाग्य के लिए, विवाहित महिलाएं कजरी तीज का उपवास रखती हैं । अविवाहित लड़कियां भी एक अच्छे पति का आशीर्वाद पाने के लिए इस उपवास को रखती हैं । महिलाएं चंद्रमा की पूजा करके उपवास तोड़ती हैं और कुछ उपवास समाप्त करने के लिए नीम के पेड़ की पूजा करती हैं ।
  • इस दिन, चावल, चना, गेहूं और जौ का सत्तू तैयार किया जाता है।
  • कजरी तीज पर, गायों की पूजा करना महत्वपूर्ण है। पवित्र गायों को पहले छोटी चपाती जो गेहूं के आटे से बनी होती हैं, को घी और गुड़ के साथ खिलाना जरूरी है। इस अनुष्ठान के बाद, भक्त भोजन का उपभोग कर सकते हैं।
  • हिंदू महिलाएं लोक गीतों पर गायन और नृत्य करके और खूबसूरत झूलों के साथ घर को सजाने के द्वारा त्यौहार का आनंद लेती हैं।
  • इस दिन का एक और आवश्यक पहलू गाने हैं। ढोल की आनंददायक आवाज़ के साथ, बिहार और उत्तर प्रदेश के व्यक्ति कजरी तीज के विभिन्न गाने गाते हैं।

कजरी तीज पूजा विधान क्या है?

देवी नीमडी या लोकप्रिय रूप से नीमडी मां के रूप में बुलाये जाने वाली, कजरी तीज के पवित्र त्यौहार से जुडी हुई हैं। भक्त इस दिन देवी नीमडी की पूजा करते हैं। पूजा शुरू करने से पहले एक अनुष्ठान भी किया जाता है जिसमें कुछ दीवार की मदद से तालाब जैसी संरचना बनाना शामिल होता है। संरचना की बाहरी सीमाओं को सजाने के लिए गुड़ और शुद्ध घी का उपयोग किया जाता है।

नीम की एक टहनी पास में लगायी जाती है। भक्त पानी और कच्चा दूध डालते हैं और संरचना के पास एक दीपक जलाते हैं । पूजा थाली को साबुत चावल, पवित्र धागे, सिंदूर, सत्तू, फल, ककड़ी और नींबू जैसी कई चीजों से सजाया जाता है। एक पतीले में, कच्चे दूध को संग्रहीत किया जाता है और शाम के समय के दौरान, भक्त नीचे सूचीबद्ध अनुष्ठानों के अनुसार देवी नीमडी की पूजा करते हैं:

  • देवी पर चावल, वर्मिलियन (सिंदूर) और पानी का छिड़काव किया जाता है|
  • मेंहदी और वर्मिलियन (सिंदूर) की मदद से, 13 बिंदु अनामिका (अंगूठी पहने जाने वाली अंगुली) के उपयोग से बनाये जाते हैं, जबकि इसी उंगली से 13 बिंदु काजल के द्वारा बनाये जाते हैं|
  • फिर, देवी को पवित्र धागा प्रस्तुत करने के पश्चात कपडे, काजल और मेंहदी प्रस्तुत किये जाते हैं|
  • इसके बाद, दीवार को उस पर चिह्नित बिंदुओं का उपयोग करके पवित्र धागे से सजाया जाता है।
  • इसके आगे, देवी को फल प्रस्तुत किए जाते हैं। पूजा कलश पर, भक्तगण कलश (पवित्र पात्र) के आसपास पवित्र धागा बांधते हैं और उस पर सिन्दूर से तिलक लगाते हैं|
  • दिए (मिट्टी के दीपक) जो तालाब के किनारे पर रखा जाता है, के प्रकाश में, महिलाओं द्वारा नोज़पिन (नाक की पिन), नीम की टहनी , ककड़ी और नींबू को देखना होता है। उसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य प्रस्तुत किया जाता है।

जाने आपका आज का राशिफल हिंदी में!

चंद्रमा को अर्घ्य प्रस्तुत करने के लिए क्या अनुष्ठान होते हैं?

एक बार जब भक्तगण नीमड़ी की पूजा कर लेते हैं, तो चन्द्रमा को अर्घ्य प्रस्तुत किया जाता है|

  • सिन्दूर और पानी डालने और पवित्र धागे बांधने के बाद, कुछ खाना और साबुत चावल चन्द्रमा को चढ़ाया जाता है|
  • हाथ में गेहूं के अनाज और चांदी की अंगूठी पकड़कर चंद्रमा को अर्घ्य प्रस्तुत किया जाता है|

व्रत एवं अनुष्ठान की अधिक जानकारी के लिए हमारे प्रसिद्ध ज्योतिषी से बात करे

कजरी तीज व्रत के अनुष्ठान क्या हैं?

  • महिलाएं जो सख्त कजरी तीज उपवास रखती हैं , उन्हें सूर्योदय से पहले सुबह जल्दी उठकर कुछ खा लेना चाहिए । उसके बाद पूरे दिन, उन्हें पानी पीने या भोजन करने से खुद को रोकना चाहिए ।
  • फिर, विवाहित महिलाएं शाम को तैयार होती हैं और उपवास समाप्त करने से पहले नीम के पेड़ और चंद्रमा की पूजा करती हैं।
  • अगर किसी महिला ने इस व्रत को रखना प्रारम्भ किया, तो उसे 16 वर्षों तक इस व्रत को रखना होगा।

कजरी तीज एक ऐसा उत्सव है जिसका सभी हिंदू महिलाओं को काफी इंतज़ार रहता है। यह उनके लिए एक जीवंत त्योहार है और काफी महत्व रखता है क्योंकि यह उनकी वैवाहिक खुशी और उनके पति के लंबे जीवन से जुड़ा हुआ त्यौहार है।

hindi
english