करवा चौथ

date  2019
Ashburn, Virginia, United States X

करवा चौथ
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Choghadiya Muhurat on करवा चौथ

उत्तर भारत में विवाहित महिलाओं द्वारा बड़े पैमाने में करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है इस एक दिवसीय पर्व को चरम उत्साह तथा श्रद्धा से मनाया जाता है। करवा चौथ के दिन पूरे दिन के उपवास का अनुष्ठान किया जाता है जिसे करवा चौथ व्रत अथवा करवा चौथ उपवास कहा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक कठोर व्रत रख कर अपने पति के जीवन की सुरक्षा तथा दीर्धायु सुनिश्चित करने के लिए प्रार्थना करती हैं। करवा चौथ मुख्यत: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और राजस्थान राज्यों में मनाया जाता है।

करवा चौथ कब है?

करवा चौथा का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष कि चतुर्थी को मनाया जाता है। करवा चौथ के मांगलिक अवसर पर कुँवारी युवतियां उत्तम वर तथा विवाहित स्त्रीयां पति की लम्बी आयु तथा समृधि के लिए व्रत रखती हैं। करवा चौथ विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न नामों से जाना जा सकता है परन्तु सभी स्थान पर इसका महत्व तथा पालन की जाने वाली परम्पराएं एक समान हैं।

करवा चौथ, कई बार संकष्ठी चतुर्थी, जो भगवान् श्रीगणेश के लिए व्रत का दिन होता के साथ मनाया जाता है। इस दिन अपने पति की लम्बी आयु की कामना करते हुए विवाहिताएं भगवान् शंकर की पूजा करती हैं. इस दिन, श्री गणेश सहित शिव परिवार की आराधना की जाती है तथा चन्द्रमा के दर्शन कर व्रत तोड़ा जाता है। चंद्रोदय के बाद चन्द्रमा को जल अर्पित किया जाता है। यह अति कठिन व्रत है जिसमे सूर्योदय तक जल की एक बूँद अथवा भोजन का एक भी ग्रास ग्रहण करना वर्जित हैं।

करवा चौथ को कर्क चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है. चन्द्रमा को मिट्टी के जिस पात्र से जल अर्पित किया जाता है उसे करवा अथवा कर्क के नाम से भी जाना जाता है। चंद्रमा को जल अर्पित करने की प्रक्रिया को अर्घ कहा जाता है। करवा चौथ पूजन में कर्क का अत्यधिक महत्व है तथा इसका किसी योग्य स्त्री अथवा ब्राहमण को दान में दिया जाता है।

करवा चौथ का इतिहास एवं कथा

करवा चौथ दो शब्द करवा (मिट्टी का बर्तन) तथा चौथ (चार) का मिश्रण है। करवा चौथ भारतीय पंचांग के कार्तिक मास के चौथे दिन मनाया जाता है। यह वर्ष का वह समय होता है जब बंधू-बांधव तथा परिवार जन पर्वों का आनंद लेने के लिए इक्कठा होते हैं। करवा चौथ पर्व के नौ दिन पश्चात दीपावली का पर्व मनाया जाया है। करवा चौथ मूलतः नव-विवाहिता तथा उसके ससुराल पक्ष के बीच गठजोड़ की ख़ुशी के पर्व के रूप में मनाया जाता था, परन्तु समय के साथ परम्परा बदल गई है तथा इन दिनों करवा चौथ पर पति की दीर्घ आयु तथा स्वास्थ्य के लिए ईश्वर का आशीर्वाद लेने के लिए व्रत रखा जाता है।

दक्षिण भारत की अपेक्षा करवा चौथ का व्रत उत्तर भारत में अधिक लोकप्रिय है। करवा चौथ के चार दिवस पश्चात पुत्रो की दीर्घ आयु तथा उत्तम स्वास्थ्य के लिए अहोई अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यद्धपि, करवा चौथ का मूल स्वरूप, समय के साथ परिवर्तित हो गया है परन्तु अपने पति की दीर्घ आयु के लिए भारतीय स्त्रियों द्वारा दिन भर के उपवास की परम्परा को आज भी उत्साह के साथ मनाया जाता है।

करवा चौथ के इतिहास को पुरातन काल से जोड़ा जा सकता है. यह मान्यता है कि वधु एवं ससुराल पक्ष की महिलाओं में जुड़ाव को मनाने के लिए करवा चौथ मनाया जाता था। अब करवा चौथ कथा के अनुसार इसे अति उत्साह से मनाया जाता है तथा इसे एक मंगल उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व निश्चित रूप से विवाहित तथा प्रतिबद्ध युगल के मध्य प्रेम के बंधन को मजबूत करता है। अत: इसे युगल जनों के लिए अत्यधिक अद्भुत तथा विशेष अवसर के रूप में माना जाता है।

करवा चौथ व्रत उत्सव कैसे मनाया जाता है?

करवा चौथ मुख्यत: देश एवं विदेश में बसने वाले उत्तर भारतीय वर्ग द्वारा मनाया जाता है। दिन भर चलने वाले करवा चौथ व्रत प्रात: सूर्योदय से प्रारम्भ होकर चंद्रोदय पर समाप्त होता है। स्त्रीयों द्वारा चन्द्र दर्शन कर अर्पण करने के बाद ही व्रत समाप्त किया जाता है। करवा चौथ का व्रत अप्रतिम है, कोई भी भारतीय विवाहिता चाहे वह विश्व के किसी भी कोने में निवास करती हो, अपने पति की लम्बी आयु के लिए पुरे दिन बिना कुछ खाए-पिए व्रत करती है।

करवा चौथ के दिन का प्रारम्भ सरगी से होता है जो इस व्रत का महत्वपूर्ण भाग है। सरगी एक विशेष भोजन होता है जिसका सेवन सूर्योदय से पूर्व किया जाता है। इस भोजन में विशेषकर, सेवैयाँ होती है जिसे सास अपनी पुत्रवधू के लिए बनाया जाता है। भारतीय रिवाजों के अनुसार, विवाहित स्त्रियाँ करवा चौथ उत्सब के दौरान घर का कोई काम नहीं करती हैं। विवाहित स्त्रियाँ करवा चौथ के दिन मेहँदी की रस्म निभाती हैं। इस दिन को विवाहित स्त्री पूर्णत: अपने पति को समर्पित करती हैं।

इस दिन का अन्य महत्पूर्ण भाग श्रृंगार है। विवाहिताएं महंगे आभूषण तथा चूड़ियाँ धारण करती हैं जो उनके विवाहित होने की निशानी है। करवा चौथ को मित्रों एवं रिश्तेदारों के मिलन समारोह के रूप में भी मनाया जाता है।

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करवा चौथ व्रत का संकल्प

करवा चौथ के दिन स्नान करने के पश्चात स्त्रियों को संकल्प करना होता है। करवा चौथ संकल्प पति व परिवार की हित कामना के लिए किया जाता है। इस संकल्प में व्रत के दिन चन्द्र दर्शन के बिना कुछ भी खाने या पीने के बिना व्रत नहीं खोलने का संकल्प भी लिया जाता है।

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