2021 एकादशी व्रत

date  2021
Ashburn, Virginia, United States

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एकादशी व्रत

2021

Ashburn, Virginia, United States

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एकादशी व्रत

एकादशी व्रत हिन्दू कैलेंडर के अनुसार बहुत ही शुभ व्रत माना जाता है। एकादशी शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘ग्यारह’ । प्रत्येक महीने में दो एकादशी होती हैं जो कि शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष के दौरान आती हैं। mPanchang पर आप एकादशी से जुडी सभी जानकारी देख सकते हैं।

एकादशी व्रत बहुत ही सख्त होता है। यह एकादशी तिथि से पहले सूर्यास्त से लेकर एकादशी से अगले सूर्योदय तक रखा जाता है यह करीब 48 घंटे का व्रत होता है।

साल 2021 के लिए एकादशी व्रत की सूची

तिथि दिनांक तिथि का समय

सफल एकादशी(कृ) जनवरी, 2021

09 जनवरी

(शनिवार)

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पौशा पुत्रदा एकादशी(शु) जनवरी, 2021

24 जनवरी

(रविवार)

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षटतिला एकादशी(कृ) फरवरी, 2021

07 फरवरी

(रविवार)

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जाया एकादशी(शु) फरवरी, 2021

22 फरवरी

(सोमवार)

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जाया एकादशी(शु) फरवरी, 2021

23 फरवरी

(मंगलवार)

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विजया एकादशी(कृ) मार्च, 2021

08 मार्च

(सोमवार)

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आमलकी एकादशी(शु) मार्च, 2021

24 मार्च

(बुधवार)

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पापमोचनी एकादशी(कृ) अप्रैल, 2021

07 अप्रैल

(बुधवार)

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कामदा एकादशी(शु) अप्रैल, 2021

23 अप्रैल

(शुक्रवार)

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वरुथिनी एकादशी(कृ) मई, 2021

06 मई

(गुरुवार)

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मोहिनी एकादशी(शु) मई, 2021

22 मई

(शनिवार)

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अपरा एकादशी(कृ) जून, 2021

05 जून

(शनिवार)

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निर्जला एकादशी(शु) जून, 2021

20 जून

(रविवार)

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योगिनी एकादशी(कृ) जुलाई, 2021

05 जुलाई

(सोमवार)

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देवशयनी एकादशी(शु) जुलाई, 2021

20 जुलाई

(मंगलवार)

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वैष्णव कामिका एकादशी(कृ) अगस्त, 2021

03 अगस्त

(मंगलवार)

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श्रवण पुत्रदा एकादशी(शु) अगस्त, 2021

18 अगस्त

(बुधवार)

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अजा एकादशी(कृ) सितम्बर, 2021

02 सितम्बर

(गुरुवार)

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परस्व एकादशी(शु) सितम्बर, 2021

16 सितम्बर

(गुरुवार)

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इंदिरा एकादशी(कृ) अक्तूबर, 2021

02 अक्तूबर

(शनिवार)

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पापांकुशा एकादशी(शु) अक्तूबर, 2021

16 अक्तूबर

(शनिवार)

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रमा एकादशी(कृ) अक्तूबर, 2021

31 अक्तूबर

(रविवार)

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देवउत्थाना एकादशी(शु) नवम्बर, 2021

14 नवम्बर

(रविवार)

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उत्पन्न एकादशी(कृ) नवम्बर, 2021

30 नवम्बर

(मंगलवार)

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मोक्षदा एकादशी(शु) दिसम्बर, 2021

14 दिसम्बर

(मंगलवार)

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सफल एकादशी(कृ) दिसम्बर, 2021

29 दिसम्बर

(बुधवार)

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एकादशी का महत्व

हिन्दू पुराणों के अनुसार एकादशी को ‘हरी वसर’ एवं ‘हरी दिन’ भी कहा जाता है। एकादशी वैष्णव एवं गैर-वैष्णव दोनों समुदाय द्वारा मनाया जाता है। एकादशी के महत्व को स्कन्द पुराण एवं पदम् पुराण में भी बताया गया है। जो भक्त व्रत रखते हैं वो इस दिन गेहूं, मसाले एवं सब्जियां नहीं खाते। श्रद्धालू इस व्रत की तैयारी एकादशी से एक दिन पहले दशमी से ही प्रारंभ करते हैं। श्रद्धालू सुबह जल्दी उठकर पवित्र जल से स्नान करते हैं एवं इस दिन बिना नमक का खाना खाते हैं।

एकादशी व्रत के नियम

ताजा फल, सूखे मेवे, सब्जी एवं दूध से बनी मिठाई ही इस दिन खाई जाती है एवं कुछ राज्यों में केवल साबुदाना, मूंगफली एवं आलू का ही भोजन इस दिन किया जाता है। दाल एवं शहद दशमी के दिन भी नहीं खाया जाता। इस दिन कुछ लोग पानी भी नहीं पीते, इसलिए इसे निर्जला एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। कुछ श्रद्धालू रात में एकादशी व्रत की कथा, कहानी एवं मंत्र पढ़ते हैं।

एकादशी के अगले दिन को द्वादशी कहा जाता है। यह दशमी या अन्य दिनों की तरह दिन आम दिन होता है। सुबह जल्दी नहाकर, दीऐ जलाकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है एवं दशमी के दिन बनाया गया भोजन खाकर व्रत पूर्ण किया जाता है।

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