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2020 हनुमान जयंती

date  2020
Ashburn, Virginia, United States

हनुमान जयंती
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Choghadiya Muhurat on हनुमान जयंती

भगवान हनुमान का जन्म पूरे भारत में हनुमान जयंती के रूप में बहुत उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। यह चैत्र माह (मार्च-अप्रैल) के दौरान मनाया जाता है।

हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है?

हनुमान जयंती हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण उत्सव है। हनुमान गुणवत्ता और जीवन शक्ति की छवि है। कहा जाता है कि हनुमान स्वेच्छा से किसी भी रूप को धारण करने की क्षमता रखते हैं, चट्टानों का उपयोग करते हैं, पहाड़ों को हिला सकते हैं, हवा में छलांग लगा सकते हैं,और उड़ान में गरुड़ के समान वेगवान हैं। वे सामाजिक मान्यताओं में अलौकिक शक्तियों के साथ दिव्यता प्रदान करने वाले और दुर्भावनापूर्ण आत्माओं को जीतने वाले के रूप में पूजनीय हैं।

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हनुमान जी ने भगवान राम की बुरी शक्तियों को ख़त्म करने के अभियान में सहायता की थी, वे हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय देवता में है। कहा जाता है कि वे भगवान शिव का अवतार है। हनुमान बल, दृढ़ संकल्प और स्वामी भक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भगवान हनुमान की जन्म कथा

भगवान हनुमान की जन्म कथा इस प्रकार है:- देवताओं के गुरु, बृहस्पति की सेविका पुंजिक्स्थला को एक महिला बंदर के रूप लेने के लिए शापित किया गया था और इसके मोचन के लिए, उसे भगवान शिव के अवतार को जन्म देना था। उन्होनें अंजना के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव को खुश करने के लिए भीषण तपस्या की। भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहा वरदान दिया।

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इसी काल खंड में, अयोध्या के राजा, दशरथ ने अपनी पत्नियों से दैवीय बच्चों को जन्म देने के लिए यज्ञ किया। अग्नि देवता प्रकट हुए और यज्ञ के प्रसाद के रूप में राजा दशरथ को उनकी इच्छा पूरी करने के लिए पवित्र मिठाई का कटोरा दिया गया। एक चील ने मिठाई का एक हिस्सा छीन लिया और उसे उस स्थान पर छोड़ दिया, जहां अंजना ध्यान कर रही थी और वायु के देवता, पवन ने उनके हाथों में गिराने में सहायता की। अंजना ने दिव्य मिठाई खाने के बाद भगवान हनुमान को जन्म दिया। भगवान हनुमान को रूद्रावतार या भगवान शिव के अवतार के रूप में भी जाना जाता है और पवन देव उनके मानस पिता माने गए हैं।

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वह चैत्र के हिंदू माह के पूर्णिमा का दिन था, जब अंजना ने भगवान हनुमान को जन्म दिया था। इस दिन, हर साल, भक्त हनुमान मंदिरों में इकट्ठा करते हैं और उनकी पूजा करते हैं। लोग इसलिए भी भगवान हनुमान की पूजा करते हैं ताकि वे अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा पैदा कर सकें और बुरे शक्तियों और आत्माओं से मुक्त हो सकें।

हनुमान जयंती कब है?

प्रत्येक वर्ष हनुमान जयंती पारंपरिक उत्साह के साथ चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती हैं। चूँकि, भगवान हनुमान का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था, इसलिए इनका जन्मोत्सव सूर्योदय पूर्व से प्रारम्भ हो कर दिवस पर्यंत सूर्यास्त पश्चात तक चलता है।

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हम भगवान हनुमान से क्या सीख सकते हैं

भगवान हनुमान निष्ठा और भक्ति का प्रतीक है। उनके पास बेजोड़ शक्ति है और वे एक महान प्रज्ञा है।

ऐसा कहा जाता है कि जब हनुमान सबसे पहले, भगवान राम से उनके निर्वासन के दौरान, जब वे अपनी पत्नी सीता खोज रहे थे , जिनका लंका के राजा रावण के द्वारा अपहरण कर लिया गया था, ब्राह्मण के रूप में मिले थे। भगवान राम को हनुमान की बुद्धि ने बहुत प्रभावित किया था कि उन्होंने त्वरित टिप्पणी की थी कि मैं बुद्धिमान व्यक्ति से मिल रहा हूं और उन्हें गले लगा लिया।

भगवान हनुमान प्रसन्न जीवन जीने के लिए बहुत सी बातें सिखाते है। उनका पूरा जीवन काल हमें बहुत सी चीजें सिखाता है जो शायद भौतिकवाद के वर्तमान युग में भी अच्छे जीवन के लिए बहुत सारे सबक देते हैं। वे हमें भक्ति सिखाते है, गंध, स्वाद, दृष्टि, स्पर्श और श्रवण की पांच इंद्रियों को कैसे मज़बूत किया जा सकता है,विश्वसनीय बनना, शक्तिशाली परन्तु विनम्र बनना, संकट में लोगों की स्वेच्छा से मदद करना, जीवन की कठिनाइयों को कैसे दूर किया जा सकता है। भगवान हनुमान गुणों का प्रतीक है: अखंडता, वीरता, बुद्धि, शक्ति, धैर्य और ज्ञान। वह बुद्धिमानों के बीच सर्वोच्च है, उन्हें 'भव्यमताम वरिष्ठाम' कहा जाता है। यदि कोई व्यक्ति आदर्श भक्ति युक्त हनुमान के तीन प्रमुख गुणों; पति व्रत भक्ति, दासत्व भक्ति और नैष्ठिक ब्रहमचर्य .. अंगीकार करता है उसे जीवन भर किसी भी कठिनाई का सामना नहीं कर पड़ता है।

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हनुमान का चरित्र हमें उन अनगिनत शक्तियों का भान कराता है जो हम में से हर एक के अंदर अप्रयुक्त है। हनुमान ने अपनी सभी शक्तियों को भगवान राम के प्यार से समन्वित किया और उनकी असीम प्रतिबद्धता को उन्होंने अंतिम लक्ष्य बनाया और वे सभी शारीरिक थकावट से मुक्त हो गए। हनुमान जी की एकमात्र कामना सिर्फ भगवान राम की सेवा करने की है। हनुमान उत्कृष्ट दास्याभाव समर्पण का प्रतीक हैं जो स्वामी और दास का बंधन को दर्शाता है, और उनके सौहार्दपूर्ण गुणों का आधार है।

ऐसा चरित्र मिलना कठिन है जो इतना सक्षम, इतना ज्ञानी, विद्वान, विनीत और रोचक है! रामायण और महाभारत के महत्वपूर्ण किवदंतियों में हनुमान का उल्लेखनीय रूप से उल्लेख किया गया है।

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