2020 कामदा एकादशी

date  2020
Ashburn, Virginia, United States

कामदा एकादशी
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Choghadiya Muhurat on कामदा एकादशी

कामदा एकादशी क्या है?

हिंदू नव वर्ष के प्रारम्भ होने की बाद आने वाली पहली एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन, लोग पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। यह देश के कई हिस्सों में चैत्र शुक्ल एकादशी के रूप में भी प्रसिद्ध है। कामदा शाब्दिक अर्थों में 'इच्छाओं की पूर्ति' को दर्शाता है। इस प्रकार, कामदा एकादशी उस दिन के रूप में मानी जाती है जब भक्तों को दिव्य आशीर्वाद मिलता है और उनकी सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति भी होती है।

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कामदा एकादशी कब है?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कामदा एकादशी चैत्र माह में शुक्ल पक्ष के दौरान ग्यारहवें दिन (एकादशी) को आती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, कामदा एकादशी मार्च या अप्रैल के महीने में आती है।

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कामदा एकादशी का धार्मिक महत्व क्या है?

हिंदू नव वर्ष की शुरुआत के साथ, कामदा एकादशी को वर्ष की पहली एकादशी माना जाता है। विभिन्न पुराणों, वेदों और हिंदू शास्त्रों में, कामदा एकादशी के महत्व का वर्णन किया गया है। श्रद्धालु कामदा एकादशी का व्रत रखकर अपने पुण्यों को वापस पा सकते हैं और उनमे वृद्धि कर सकते हैं। यह भक्तों को सभी प्रकार की बुराइयों और शापों से भी बचाता है। जो लोग व्रत का पालन करते हैं वे अपने सभी अतीत और वर्तमान पापों से छुटकारा पा सकते हैं और मोक्ष भी प्राप्त कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि कोई निःसंतान दंपति इस व्रत का पालन करता है, तो उन्हें एक पुरुष संतान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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कामदा एकादशी के अनुष्ठान क्या हैं?

  • कामदा एकादशी पर, भक्त सुबह जल्दी उठते हैं और पवित्र स्नान करते हैं।
  • भगवान विष्णु की पूजा और प्रार्थना करने के लिए तैयारी की जाती है।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति की पूजा धूप ,चंदन के पेस्ट, फल, अगरबत्ती, और फूल से की जाती है ताकि देवता को पुकारा जा सके।
  • भक्त भोजन करने से परहेज करते हैं। सौम्य रूप में ,वे एक दिन में एक ही बार भोजन का सेवन कर सकते हैं जिसमें केवल सात्विक भोजन शामिल होता है।
  • कामदा एकादशी का व्रत दशमी से शुरू होता है जहां भक्तों को भोर से पहले भोजन ग्रहण करना होता है।
  • व्रत 24 घंटे की अवधि तक रहता है अर्थात् अगले एकादशी के दिन सूर्योदय तक।
  • ब्राह्मण को भोजन, कपड़े और अन्य आवश्यक चीजें दान करने के बाद उपवास समाप्त होता है।
  • भक्त पवित्र मंत्रों का जाप करते हैं और देवता के सम्मान में गीत गाते हैं।
  • लोग भगवान विष्णु के दिव्य आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए 'विष्णु सहस्त्रनाम' का पाठ भी करते हैं।
  • श्रद्धालुओं को अपना व्रत पूरा करने के लिए कामदा एकादशी व्रत कथा सुनना आवश्यक है।

जाप करे: श्री विष्णु मंत्र

कामदा एकादशी व्रत कथा (कहानी) क्या है?

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, कामदा एकादशी की किवदंती भगवान कृष्ण ने राजा युधिष्ठिर को सुनाई थी। किंवदंती में कहा गया है कि एक युग में ललिता नाम की अप्सरा और ललित नाम के गंधर्व एक जोड़ी थी। ये दोनों राजा पुण्डरीक जो रत्नपुरा शहर पर शासन करते थे, के दरबार में अपनी सेवाएँ देते थे ।

एक बार, सभी गंधर्व राजा के दरबार में गायन के लिए गए, ललित भी उनके साथ गया। लेकिन उस समय, ललिता दरबार में प्रस्तुत नहीं थी और इस तरह ललित अपनी पत्नी ललिता के विचारों में खो गया जिससे उसके प्रदर्शन पर असर पड़ा। यह सब एक नाग ने देख लिया जिसने तब राजा पुंडरीका को इस सब के बारे में सूचित कर दिया। यह सुन कर राजा आगबबूला हो गया और उसने ललित को एक बदसूरत दानव में बदलने के लिए शाप दिया, ताकि ललिता उसे और उसके प्यार को त्याग दे।

ललित को तुरंत एक भूतिया और भयानक दिखने वाले दानव में बदल दिया गया। जब ललिता को यह सब पता चला, तो वह बहुत उदास हो गई। दोनों एक समाधान प्राप्त करने के लिए निकल पड़े और इस तरह विभिन्न स्थानों पर भटकने लगे। एक दिन वे विंध्याचल पर्वत पर पहुँचे जहाँ उन्होंने ऋषि श्रृंगी का आश्रम देखा। ललिता ने ऋषि से मदद और मार्गदर्शन मांगा ताकि ललित को उसके अभिशाप से राहत मिल सके। इसके लिए, ऋषि श्रृंगी ने उन्हें कामदा एकादशी का व्रत रखने को कहा जो एकादशी पर शुक्ल पक्ष के दौरान चैत्र महीने में आता है।

ललिता ने सभी अनुष्ठानों के साथ व्रत का पालन किया और देवता से उनके शाप से मुक्त होकर अपने पति ललित को इस व्रत का आशीर्वाद देने के लिए कहा। व्रत पूरा होने के तुरंत बाद, ललित को एक बार फिर से अपना असली रूप मिला। उस दिन के बाद से, भक्त अपनी सभी इच्छाओं को पूरा करने के लिए कामदा एकादशी का व्रत रखते हैं।

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